
माई ओ माई,
क्युंकर कहूं मैं इस दिल की बात
प्रेम रस में भीगे मन से यों जागे मोरे भाग
मोरा प्रीतम, मोरा साजन, मोरा रांझा,
मोरा बालम, मोरा कान्हा, मोरा साईं
बीरह बीती, जग छूटा,
उसने कुछ ऐसे प्रीत जगाई
ढूंढत फिरी जिसको मैं
मंदिर मस्जिद दिन रैन
उस सांवरे से बावरे से
लागे मोरे नैन
झोली भर दी मोरी माई,
मोहे मतवाली कर दिया,
यों जागे मोरे भाग
सुख दुख का वो संगी है,
लागी अब ये छुटत नाहीं,
मैं गाऊं बस ये राग
लोग हंसे मुझपे जो मैं नाचूं गाऊं
मदमस्त मतवाली होकर
ढूंढत फिरी जिसको मैं,
वो रांझना सलोना मैं पाया अपने भीतर
रंग रसिया वो मन्न बसिया,
है खेले नित होली मोसे
मोरे साईं के प्यार में
अखियन से नित आंसू छलके
सखियां देवें ताने मोहे,
जग में हुई बदनाम
प्रीत की लत ये ऐसी लागी,
नाचूं गाऊं सुबोह शाम
मैं मतवारी मोरे प्रीतम की प्यारी,
मोरा बालम, मोरा साईं
पा लिया जो उसको अब,
तो दुनिया भई हरजाई
माई ओ माई,
क्युंकर कहूं मैं इस दिल की बात
प्रेम रस में भीगे मन से
यों जागे मोरे भाग।
– पुष्पेन्द्र राठी










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