Whispers Of Eternity:

एक बज़्म ये उसके है नाम मुल्ला, काज़ी, पंडित, पाजी  हर रोज़ पढ़ें उसका कलाम जिसके जग में लाखों हैं नाम फिर भी बशर न समझे अपना वजूद, अपना असली धाम सुबह-शाम दर-दर भटके आख़िर सबका वही अंजाम शून्य से जन्मी है ये दुनिया तमाम शून्य में ही मिलती है ढलती शाम मूल से जुड, … Continue reading Whispers Of Eternity:

The Eternal Quest:

तू कुजा मन कुजामन कुजा तू कुजामजाज़ी में, हक़ीक़ी मेंफ़र्क क्या है ये बता मैं शब-ए-फ़िराक़तू ख़्वाब-ए-विसालमेरे स्याह बादबान पेहै तेरा रंग-ए-जमाल मैं पैरहन-ए-दरवेशतू ताज-ए-शहंशाहमैं सजदा-ए-सवालीतू रहमत-ए-ख़ुदा मैं सवाल-ओ-ज़वालतो तू जवाब-ओ-उरूज़रहमोकरम तेरा बहता चलेबन दरिया-ए-नूर बदस्तूर तू कुजा मन कुजामन कुजा तू कुजाअक्स और शख़्स मेंफ़र्क क्या है दे बता जिंदगी के दश्त-ए-ग़म मेंतू सुकून-ए-नखलिस्तानमेरी … Continue reading The Eternal Quest:

Longing:

लिए इन भीगे नैनन मेंपिया की उजली छाप,बिरह की कारी रैना मेंजिया रोशन उनके साथ ज्यों चंदा और चकोरीयों दिया संग बाती,राधा का नंद का ग्वालाऔर ब्रज की हर गोपी ओ रे बदरा बावरेक्या तुम आए परदेस से,मोरे पी ने तुम्हरे हाथोंक्या भेजा कोई संदेस रे ए चमक दमक ओ दामिनीजिस गति से तू लहके … Continue reading Longing:

“मत सहल हमें जानो, फिरता है फलक बरसों; तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं” – मीर तकी मीर (खुदा ए सुखन)

"There is a kind of sadness that comes from knowing too much, from seeing the world as it truly is. It is the sadness of understanding that life is not a grand adventure, but a series of small, insignificant moments, that love is not a fairy tale, but a fragile, fleeting emotion, that happiness is … Continue reading “मत सहल हमें जानो, फिरता है फलक बरसों; तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं” – मीर तकी मीर (खुदा ए सुखन)

For The Free Flying Falcon:

इकरार और इजहार के बीचजो वो एक दयार हैउस मरुस्थल पेइस कम्बख्त दिल कीएक बेनूर सी मजार है दर्दे दिल के अनकहे किस्सोंसे मैं रोज़ उसे सींचता हूंगुजरे लम्हों के वाकयात सेमैं शबो रोज़ उन्हेंवक्त के पहिए पेहौले हौले पीसता हूं चंद रोज़ पहले दूर देस से एकबागी परिंदा मेरा हमराज बनाअपने घोंसले, अपने घरोंदे … Continue reading For The Free Flying Falcon:

Rise Up:

Rise up, rise up!It's another glorious dawnThe velvet blue skiesWelcome you with open arms Brew a cuppa coffeeand roll on…It's a beautiful dayWaiting to embrace youwith arms open wide Dewdrops shine onthe verdant grassy lawnsWake up and roll onwith another blessed day The sun's gonna shine onyou with all it's mightBrighten up and embraceThe Lord's … Continue reading Rise Up:

Jugni – The Soul Song:

नाम जिसदा अनाम है अनाम होके वी नाम है  तेरे मेरे विच जो वसदी उस ज़ुगनी दी एहों दास्तान है घरों तों निकली ज़ुगनी छुट गया पिंड, ते भुल्ली सब नी  ज़ुगनी आ पहुँची मायानगरी  जित्थे किसे दा भी ख़ुद कुछ नी मैं, मेरा नी सब करदे जित्थे बस मैं ही मैं, ना कुछ आगे … Continue reading Jugni – The Soul Song:

Ishq – The Ballad Of Love:

दास्तान-ए-इश्क़ का भी है अजीब फ़लसफ़ा, बला भी दुआ लगे हो मय्यत् भी एक कहक़शाँ इश्क़बाज़ी में मुकम्मल  करते चलें हर काम को, वफ़ा, बेवफ़ाई से परे परवाज़ उसके नाम को ग़म को दरकिनार कर दूर कर शिकवा गिला, भले का तो भला है ही तू कर बुरे का भी भला कुछ कुफ़्र से ख़यालात … Continue reading Ishq – The Ballad Of Love:

Ode To The One I Love:

ख़्वाबों को  ख्वाहिशों को बीते लम्हों को,  भूले वादों को ज़हन में आते  रूह को भाते, उड़ते फिरते  से उन अरमानों को उस वादी की धुँधली सी यादों को, और वो खूँटी पे टंगा तुम्हारा ग़ुस्सा,  ले चलें साथ उसे भी… सिगरेट के साथ जो ख़ाक हुई  तड़के तक जलती रही, फिर सहर के उजाले … Continue reading Ode To The One I Love:

Yoga – Philosophy vs Practice:

योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:  कहाँ ये कम्बख्त दिल बेताब है हज़ारों ख़्वाहिशें लिए  सुकून को करता तलाश, कर बग़ावत दिल से हम  अपनी ही फ़ाकामस्ती में  फ़क़ीर बन कब़ीर बन  लाएँगे एक रोज़ इंक़लाब… Yoga is restraining the mind-stuff from taking various forms. But there are a thousand desires, yet the impatient heart looks for peace. But now … Continue reading Yoga – Philosophy vs Practice:

Ode To The Self:

वो बूझें हैं तू कौन है  तेरा धर्म क्या, तेरी जात क्या  रूतबा नहीं, रूपया नहीं  है तेरी भी औक़ात क्या नाम, धर्म, जात, धन  बना रहे हैं जो मुद्दा  कैसे भला वो समझेंगे सिद्धार्थ कैसे बना बुद्धा सोचूँ मैं कि कैसे कहूँ  पर चुप भी मैं कैसे रहूँ  मेरी बेख़ुदी क्या समझेंगे  ख़ुद का … Continue reading Ode To The Self:

Ode To Humankind (Hindi):

जंगल जंगल, पर्वत पर्वत ढूँढे फिरे क्या दरबदर, क़ाबा, काशी, मंदिर, मस्जिद  सबकी ख़ाक छानता है, भँवरों के जैसे फिरे फूलों पे जाने क्या तलाशता है, कस्तूरी सी वो गंध है तुझमें ही ख़ुद को ही पर ना पहचानता है क्यूँ है तू ऐसे खोया सा  ख़ुद से ही रहता गुमशुदा, अपने भीतर देखा नाहीं … Continue reading Ode To Humankind (Hindi):

A Sonnet For Maya:

बंजर पड़ी थी दिल की ये मट्टी अरमां थे कि फिर गुलज़ार हों ढूंढता फिरता था मैं नादान बहार को कभी इस गली तो कभी उस गली पुराने जख्म रिस्ते थे हुज़ूर मगर दिल को यकीन भी था ज़रूर बंजर मट्टी में गुलिस्तां खिलेगा हमराही एक ना एक रोज़ मिलेगा दबे पांव आयी जो तुम … Continue reading A Sonnet For Maya:

The Electorate Song, India 2019:

जय जय जय हो लोकतंत्र की  जय बोलना सबको आता है  सवाल के जवाब में  दोष औरों को दिया जाता है  गौ माता की जय है यहाँ  गौ रक्षा की वो करते बात  मारे कितने गौ वध के नाम पे  बढ़ता गया गौमाँस निर्यात  क्यूँकर हुआ पूछा जब तो  वही मिला फिर से जवाब  विरोधियों … Continue reading The Electorate Song, India 2019:

Ode To Free Flowing Wind:

हवा, हवा ऐ हवा कौन देस आई तू बता, उड़ती फिरे तू मनचली सी बता क्या है तेरा पता मेरे लिए पैग़ाम कोई लाई है तो मुझको सुना, मेरे घर का हाल दे कैसे हैं सब, मुझको बता सीली सीली सर्द सी है नमीं ये क्या उन पहाड़ों की, भीनी भीनी महकती ख़ुशबू मेरे बाग़ान … Continue reading Ode To Free Flowing Wind:

Ode To The Himalayas:

दिल ले चला है आज फ़िर  उस बेख़ौफ़ सी उड़ान पे, उड़ता फिरूँ आज़ाद मैं बेपरवाह इस जहान से वो विशालकाय पर्वत तेरे तेरी हसींन वो वादियाँ, याद है हमको बख़ूबी उस वादी से उठता धुँआ कैसे करूँ बयाँ मैं तेरे हुस्न को हिमालय, हूर से भी ख़ूबसूरत है तेरा ये गुलिस्तां कभी हौले से … Continue reading Ode To The Himalayas:

The Song Of Life:

ग़ज़ब तमाशा, अजब कहानी देखो रे भाई, सुनो ओ ज्ञानी राह भी वो, राही है जो  खेल खिलाड़ी, दामन चोली  अंत भी वो, आरम्भ है जो  आँख मिचोली ऐसी हमजोली सत से सत्य, सत्य की गाथा  नए रूप में गयी गढ़ी चित्त की सूखी भूमि पर जब  चेतना की ओस गिरी  कालचक्र शुरू हुआ तब  … Continue reading The Song Of Life:

India, Pakistan – The Story Of Our Lives:

बरसों पहले मेरे गाँव में बूढ़े पीपल की छाँव में  ईद दिवाली सब मनती थी  कलियाँ हर बगिया खिलती थी रूखी सूखी जैसी मिलती थी  रोटी पर सब में बँटती थी  एक रब के सब बन्दे सारे  नाम तरीक़े सबके न्यारे गंगा जमुना तहज़ीब पुरानी  रिश्ते थे फ़क़त सुर्ख़ रूहानि मंदिर मस्जिद में फ़र्क़ ना … Continue reading India, Pakistan – The Story Of Our Lives:

For Palestine:

आफ़ताब है रूह जब अपनी  रोशन करते चलें चलो उन मायूस स्याह गलियारों को  आशियाँ है वहाँ भी मेरे यार का  जहाँ देखूँ पाऊँ उसको वहाँ चलो एक चराग जलायें वहाँ  ग़मों अन्धेरों की है दहशत जहाँ  घोंसले बचाने में सब मसरूफ  अजब सी कश्मकश है वहाँ  दौड़ते भागते परेशाँ से  बदहवास बाशिंदे हैं बहुत  … Continue reading For Palestine:

Ode To Baba Bulleh Shah:

लोकीं तुरदे फिरदे काबा काशी ते जौंदे तीर्थ हज नूं जंगा, रंगा चे उलझे रेहंदे फतेह करदे इस फानी जग नूं अस्सां हारे हुयां दे कदमां ते जबीं धरदे ख़ाक विच पड़यां नूं औतों चुकदे अस्सी रोला पांदे बस एक नफ्स नाल मैं, मेरा दे अक्स नूं अप्पां कर दियो हलाल अस्सां एहों मना लित्ता … Continue reading Ode To Baba Bulleh Shah:

For The Sons Of The Soil:

किसान ते मोड़यां ते हैगी सारी धरती ने, ते किसान नूं क्यूंकर आपां कल्ला छड़ां उन धरती ते लालां नूं मिट्टी चे रुला दित्ते राजनीति माड़ी ने, बादशाहत हिंदू मुस्लिम करदी, ते किसान रब एक्कों हैगा केहेंदे नी ज़माना सानूं कमला केहंदा, ते अस्सी अन्नदाता वाहेगुरु केहंदे अस्सां किसानां नाल खड़े नीं इंकलाब जिंदाबाद। - पुष्पेंद्र राठी

The Carefree Self:

"प्रेम रस में कुछ ऐसे डूबी है ये कश्ती ए ज़िन्दगी, राह राही, मंज़िल मुकाम कुछ नजर ही नहीं आता कम्भख्त" - पुष्पेंद्र राठी

Ode To Heer And Meera:

माई ओ माई, क्युंकर कहूं मैं इस दिल की बात प्रेम रस में भीगे मन से यों जागे मोरे भाग मोरा प्रीतम, मोरा साजन, मोरा रांझा, मोरा बालम, मोरा कान्हा, मोरा साईं बीरह बीती, जग छूटा, उसने कुछ ऐसे प्रीत जगाई ढूंढत फिरी जिसको मैं मंदिर मस्जिद दिन रैन उस सांवरे से बावरे से लागे … Continue reading Ode To Heer And Meera: