Ode To The One I Love

ख़्वाबों को 

ख्वाहिशों को

बीते लम्हों को, 

भूले वादों को

ज़हन में आते 

रूह को भाते,

उड़ते फिरते 

से उन अरमानों को

उस वादी की धुँधली सी यादों को,

और वो खूँटी पे टंगा

तुम्हारा ग़ुस्सा, 

ले चलें साथ उसे भी

सिगरेट के साथ जो ख़ाक हुई 

तड़के तक जलती रही,

फिर सहर के उजाले में 

होकर फ़ना फिर एक बार,

तमन्ना जो नामुराद गई

आओ एक गठ़री में बांधें

और ले चलें साथ अपने,

सर्दी में लकड़ी के साथ 

तंदूर में जलाएँगे

याद होगा तुमको भी

वो अब्रे शब, वो चाँदनी,

आओ बुनें उन लम्हों को 

और बनायें एक चादर गुलाबी

बरफ़ के दिनों में

आग के सामने, 

तेरे आग़ोश में

ठलती उम्र के साथ,

गुज़रे लम्हों को फिर से आबाद करेंगे

छूकर तेरे लबों को

बन कर फिर आफ़ताबी,

हाथ थाम कर तेरा

भव सागर में संग संग,

हम यूँ ही इश्क़ का

इस कायनात में,

रह रह कर रूहानि आग़ाज़ करेंगे…

– पुष्पेंद्र राठी


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