
जय जय जय हो लोकतंत्र की
जय बोलना सबको आता है
सवाल के जवाब में
दोष औरों को दिया जाता है
गौ माता की जय है यहाँ
गौ रक्षा की वो करते बात
मारे कितने गौ वध के नाम पे
बढ़ता गया गौमाँस निर्यात
क्यूँकर हुआ पूछा जब तो
वही मिला फिर से जवाब
विरोधियों की साज़िश है
करते वो माहौल ख़राब
बोल गौ माता की जय…
गंगा सड़ती ही जा रही
कहते आँकड़े विज्ञान के
राजकुमारी ने गंगा जल पिया
ठोको ताली इस बात पे
सच्चाई दब गयी प्रचार के नीचे
गुणगान करो सब आँखें मींचे
गंगापुत्र सिंहासन पे है
हैं सब उसके क़दमों के नीचे
बोल गंगा मय्या की जय…
आए दिन यहाँ आतंकी नए पकड़े जाते हैं
देसी कट्टे, अल्पसंख्यक से वो हमको बचाते हैं
आरडीएकस लेकिन फिर भी
आतंकी कैसे पाता है
मर गए सैनिक तू ग़म ना कर
उन्हें बदला जो लेना आता है
सुरक्षा में इस महा चूक पे
जब माँगना चाहा उनसे जवाब
बालाकोट का क़िस्सा सुनाया
है छप्पन इंचि सीना जनाब
बोल भारत माता की जय…
नेहरु का है दोष जी सारा
पटेल जो ना शाह बन पाए
संघ ही तारणहार है बस
अब वो ये हमको समझाए
पटेल ने ही संघ को बैन किया
ये भी ना वो हैं बतलाए
सच की क्या औक़ात है
प्रचार प्रसार जो चाहे दिखलाए
भक्ति में शक्ति है जी
पर सच को ना जो जानना चाहता है
बन अंध भक्त वो ज्ञानी
बस एक ही राग गाता है
इस शोर में, उन्माद में
फिर ऐसा मज़ा आता है
राष्ट्रवाद, देशभक्ति की
बस भगवा ही फिर एक भाषा है
हम भगत के, आज़ाद के
गांधी के, सुभाष के
वंशज हैं उस राष्ट्र के
सच्चाई के चौकीदार हैं हम
सच बोलें सीना तान के
जय जय जय हो लोकतंत्र की
जन गण जहाँ भाग्य विधाता है
सत्यमेव जयते है जहाँ
वो मेरा भारत कहलाता है…
– पुष्पेंद्र राठी






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