Eternal Flame of Love

तुझ बिन पिया जाऊं कहाँ

तेरे रंग में रंगा है ये सारा जहाँ

तन-मन तेरे प्रेम में समाए

चादर-झोला सब तुझसे पाए

दुनिया कहे, “बैरन है ये प्रीत”

पर मैं जानूं, ये ही तो है सच्ची रीत

ज्यूं नैनन में ख्वाब तुझसे जुड़े

यूँ तू समाया, मेरे रोम रोम में, रूह में बसा

तेरा प्रणव शब्द हर सांस में सुनूँ

रहूँ तेरी धड़कन, तेरे संगीत में गूँजूँ

अब क्यों रहूँ मैं अकेली, तन्हा

तू संग हो जब, हर रास्ता

हर क़दम, है तुझसे जुड़ा

अब अंत जो भी हो इस देह का

तेरे रंग में रंगी मेरी रूह का

तू साया बनकर साथ चले

मेरी जीवात्मा का

पिया, अब जाऊं तो जाऊं कहाँ

तू रहे संग मेरे, दिन-रैन

तुझसे सजा मेरा हर पल

तेरे रंग ने हयात को रंग दिया

अब ये बसंती रंग कभी न उतरे

कभी न अब ये फीका होगा

क्योंकि तू है हर रूप में

जीवन की हर जंग में

हर अंग में, हर रंग में

मेरी हर सांस, तुझसे रची, सब तुझमें समाया

मेरा बसंती चोला, मोरा रंग, मोरा ढंग

सब तुझी से है, मोरे मन बसिया

जो तू है मोरे संग

तोरे संग लागी अब ये लगन

जितने भी कोई करे जतन

न बुझे कभी ये प्रेम अगन

– पुष्पेंद्र राठी


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