Jugni – The Soul Song

नाम जिसदा अनाम है

अनाम होके वी नाम है 

तेरे मेरे विच जो वसदी

उस ज़ुगनी दी एहों दास्तान है

घरों तों निकली ज़ुगनी

छुट गया पिंड, ते भुल्ली सब नी 

ज़ुगनी आ पहुँची मायानगरी 

जित्थे किसे दा भी ख़ुद कुछ नी

मैं, मेरा नी सब करदे जित्थे

बस मैं ही मैं, ना कुछ आगे पिच्छे

लाई रौनक़ाँ, खेल न्यारे

अपणे ही बस लगदे प्यारे

जितण नू सब लड़ते फिरदे

मखौल उस दा जैड़ा हारे

रंग अनेकों, ढंग से कई नी 

वख़री ज़ुगनी रंगा चे रुलगी

आइ जवानी रंग थे न्यारे

औदे हुस्न दे पिच्छे पड़गे सारे

दरिया वरगा ए वक़्त है काफ़िर 

तुरदा फिरदा जैसे कोई मुसाफ़िर

ढ़ली जवानी, ढ़ले नज़ारे

भला ज़ुगनी नूँ हूँण कौन निहारे

उम्र नालों काया जाँदी 

साँस नालों माया जाँदी

फ़ेर भी ना जाँदा ए फ़ितूर

ऐहो मायानगरी दा दस्तूर

सब घुम्मया, परखा, वेख्या

हुँण आया ज़ुगनी नूँ चेता

सदा रहणा नहीं कुछ संग नी 

आख़िर जाणा है फिर घर नी

एक मेला है एहों जग जी 

तूसी क़दर करो जी सब दी 

चिट्टे, काले नू छड्डो

बेरंग भी है एक रंग जी 

एवें ज़ुगनी नचदी फिरदी

फ़िर पिंडों अपने चलदी

एहों ज़ुगनी दी दास्तान है

फ़िर भी ना औंदी पहचान है

नाम जिसदा अनाम है

अनाम होके वी नाम है

वो ही तो इक सतनाम है।

– पुष्पेंद्र राठी


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