Ode To Free Flowing Wind

हवा, हवा ऐ हवा

कौन देस आई तू बता,

उड़ती फिरे तू मनचली सी

बता क्या है तेरा पता

मेरे लिए पैग़ाम कोई

लाई है तो मुझको सुना,

मेरे घर का हाल दे

कैसे हैं सब, मुझको बता

सीली सीली सर्द सी

है नमीं ये क्या उन पहाड़ों की,

भीनी भीनी महकती

ख़ुशबू मेरे बाग़ान सी

जाके आई तू मेरे गाँव क्या 

कर गुफ़्तगू मुझको बता,

हवा, हवा ऐ हवा

कौन देस आई तू बता

कैसे हैं वो सब यार मेरे

कैसी है मेरी दिलरुबा,

भेजा किसी ने संदेश कोई

तेरे हाथ तो मुझको बता

आते हैं मुझको याद वो सब

करता हूँ मैं रब से दुआ,

बँद कर अब ये अटखेलियाँ

जा मेरे वतन तू लौट जा

हवा, हवा ऐ हवा

जा तू मेरे गाँव जा,

ले जा अपने सँग तू

हासिल है जो मुझको यहाँ

महफ़ूज़ रखना घर को मेरे

है दिल मेरा बसता वहाँ,

हवा, हवा ऐ हवा

जा तू मेरे देस जा…

– पुष्पेंद्र राठी


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