Whispers Of Eternity

एक बज़्म ये उसके है नाम

मुल्ला, काज़ी, पंडित, पाजी 

हर रोज़ पढ़ें उसका कलाम

जिसके जग में लाखों हैं नाम

फिर भी बशर न समझे

अपना वजूद, अपना असली धाम

सुबह-शाम दर-दर भटके

आख़िर सबका वही अंजाम

शून्य से जन्मी है ये दुनिया तमाम

शून्य में ही मिलती है ढलती शाम

मूल से जुड, फिर ले परवाज़ 

इस धरती पर एक नया काफिला बना

वो जो सबका है, एक धागे में पिरोया

जितना वो तेरा भी है, है वो उतना ही मेरा

आ मिल जा, जुड़ जा उस एक से

खिला दे इस ज़मीं पर नया गुलिस्तां

दे तोड़ माया के पिंजरे को

चल हाथ ले मेरा ये थाम

बेफिक्र, बेखौफ चल

चल चलें हकीकी की राह

ज़माना साथ चले ना चले

तू थामे रहना मेरा साथ 

फकीरों की राह ही

है सच्ची रहमत की राह

फकीरों के साथ चलती आई 

है सदा कायनात 

इन्कलाब लाया है इश्क 

आई है फ़िर से बहार 

खिले हैं गुल फ़िर से

पिया मिलन ही है ये रात

चौखट रौशन फिर से मेरी 

नूर बरसे आज की रात

हिज्र की तन्हा शबों के बाद

आई रे पिया मिलन की रात

फकीरों की राह पर 

है बरसता आसमां

साजन के आगोश में 

गुलाबी होगी शब-ए-विसाल

– पुष्पेन्द्र राठी


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